चिन्ता किसी का पीछा नही छोड़ता है !

चिन्ता किसी का पीछा नही छोड़ता है !

चिन्ता नामक यह दो अक्षरोवाला शब्द बड़ा ही खतरनाक है ! चिन्ता जो हर किसी को होता है ! यह प्रत्येक मनुष्य मे किसी न किसी रुप मे रहती है ! इससे कोई भी छुतकारा नही पाता ! जिसके पास चिन्ता नही है वह दुनिया मे भी नही है ! जिसके पास सब कुछ है, लोग समझते है कि उसकी किसी बात की चिन्ता नही है ! जी हॉ सब कुछ का मतलब जैसे धन, दौलत, सम्पति एवं किसी चीज कि कमी नही ऐसे लोगो को भी किसी बात चिन्ता नही है ! 



लेकिन ऐसा नही है वे भी अपने मनिविनोद अथवा मन की ईच्छनुसार अपने जीवन की सार्थकता के चिन्तन मे लगे रहते है ! इस प्रकार अमीर-गरीब सभी किसी न किसी चिन्ता मे ग्रसित रहते है ! धनवान व्यक्तियो कि अधिकाधिक धन बटोरने की चिन्ता, गरीब-दरिंद्र लोगो को खाने-पीने, वस्त्र आदि की चिन्ता लगी ही रहती है ! कोई अपने प्रतिष्ठा की चिन्ता करते है, तो कोई अपने प्रतिपक्षी को नीचा दिखाने की चिन्ता मे मग्न है ! इस प्रकार सभी कोइ न कोइ चिन्ता मे रहते ही है !


चिन्ता को लेकर लोगो की सोच !

कुछ लोगो का मानना है कि जिनका हर प्रकार की सम्पति से भरपुर है उनका तो किसी बात की चिन्ता नही होना चाहिए ! क्या ये सच है हॉ मानते है कि उसकि यानी ऐसे धनवान लोगो कि गरीब लोगो की तरह खाने-पीने, वस्त्र की चिन्ता नही है ! लेकिन ऐसे लोग भी किसी न किसी चिन्ता मे ग्रसित रहते है !

दिन-भर के दौड़-धुप के बाद जब लोग रात को नींद की गोद मे विश्राम लेते है, तब भी चिन्ता देवी हमे एक दुसरी दुनिया मे विचरण कराती है ! स्वप्नावस्था मे यह नही जान सकते कि हम जो कुछ कर-धर और देख सुन रहे है, वह सब मिथ्या कल्पना है ! विलायती दिमाग्वालो लोगो के अनुसार स्वप्न का कुछ फल नही होता मानते है ! परंतु हमारे पूर्वजो ने निशिचत की है कि यह कभी निष्फल नही हो सकता ! स्वप्न भी चिन्ता शक्ति की ही लीलाएँ है ! यह वह शक्ति है, जिसका अवरोध करना मनुष्य के लिए दु:साध्य ही समझना चाहिए !


चिन्ता को लेकर ऐसा भी कहा गया है कि अगर ज्यादा चिन्ता हो तो शरीर की हानि होता है ! बहुत लोग सोचते है कि अच्छे कामो तथा अच्ची बातो की चिन्ता से शरीर और मन को हानि नही होती ! परंतु परोपकारमूलक अथवा आत्म कल्याणमूलक चिन्ता भी जो सत्पुरुषो, देशानुरागियो और भगवद भक्तो को होती है ! वह भी शरीर के लिए पोषक न होकर प्राय: शोषक ही सिद्ध होती है !


चिन्ता से बचने की कोशिस करे !

चिन्ता बड़ी ही बुरी बला है ! साहित्य-संगीत-कला मे अनुरिक्त होने पर मनुष्य चिन्ता से बहुत कुछ बच सकते है ! यह आयी तो सब तरह से मरण हुआ ! इसलिए इससे जहॉ तक हो सके बचे ही रहना चाहये ! बचने मे हानि या कष्ट हो, तो भी डरना नही चाहिए ! जिस काम को किये बिना भविष्य मे हानि की संभावना हो, उसकी पुर्ती की चेष्टा करते रहना चाहिए, पर तद्विषयक चिन्ता को पास पटकने नही देना चाहिए ! इस रीति से बहुत कुछ बचाव हो सकता है !


चिंता किसी का पीछा नही छोड़ता है लेकिन हमे हमेशा चिन्ता से पीछा छुड़ाना चाहिए !