देश के महापुरुषो मे से एक ये भी थे

श्रीमंत शंकरदेव देश के महापुरुषो मे से एक थे ! वे सूरदास, कबीरदास, तुलसीदास, नानक आदि संत महापुरुषो की कोटि के थे ! उन दिनो असम का समाज अनेक कुरीतियो से ग्रस्त था ! तरह तरह के कर्मकाण्ड प्रचलित थे ! असम उस समय अनेक धर्म सम्प्रदायो मे विभक्त था ! उसी समय यहॉ श्रीमंत शंकरदेव का उदय हुआ !




श्रीमंत शंकरदेव का जन्म सन कब हुआ था ?


श्रीमंत शंकरदेव का जन्म सन 1449 ई. मे नगॉव जिले के अलिपुखरी गॉव मे हुआ था ! शिरोमणि कुसुम्बर भूयॉ उनके पिता और सत्यसंध्या उनकी माता थी ! माता-पिता ने बड़े प्रेम से अपने पुत्र का नाम शंकर रखा था ! बचपन मे ही उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई ! इसलिए बालक शंकर का पालन-पोषण उनकी दादी खेरसुती ने किया !

श्रीमंत शंकरदेव कौन थे? हिंन्दी मे


बड़े होने पर शंकर को महेंद्र कंदलि के पाठशाला मे पढ़ने के लिए भेजा गया ! वे बड़े कुशाग्र बुद्धि के थे ! अत: पाठशाला मे जल्दी ही उन्हे व्याकरण
, रामायण, महाभारत ज्योतिष आदि विद्धाओ का ज्ञान प्राप्त हो गया ! पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका विवाह सूर्यवती नामक कन्या से कर दिया गया ! सूर्यवती से एक लड़की भी पैदा हुई थी !

अब तक घर-गृह्स्थी का भार भी शंकरदेव पर आ गया था ! परंतु इस काम मे उनका मन न लगा ! इसलिए 32 वर्ष की अवस्था मे वे तीर्थस्थानो के भ्रमण के लिए निकल पड़े ! 12 वर्ष तक उन्होने उत्तर भारत के कई स्थलो का भ्रमन किया ! वे काशी, बद्रीनथ, गया, बृन्दावन, गोकुल, मथुरा आदि गये ! वहॉ उन्होने अनेक विद्वानो से भेंट की ! उनके संपर्क से शंकरदेव को व्यापक धार्मिक बाते जानने को मिली !

श्रीमंत शंकरदेव देश के महापुरुषो मे से एक थे !


देशाटन से लौटकर शंकरदेव ने एकशरण नाम धर्म की स्थापना की ! इसे वैष्णव धर्म भी कहते है ! उन्होने मूर्ति पूजा के स्थान पर विष्णु के नाम जपने या उन्हे गीत रुप मे गने पर अधिक जोर दिया ! उन्होने कई नामघरो एवं सत्रो की स्थापना की ! उन्होने ताली बजाकर ईश्वर का भजन करने के लिए लोगो को प्रेरित किया ! उनके द्वारा स्थापित कई नामघर और सत्र आज भी मौजूद है ! आज भी असम के विभिन्न नामघरो (मंदिरो) मे लोग ताली बजाकर ईश्वर का भजन गाते है !



श्रीमंत शंकरदेव ने अनेक धर्मिक पुस्तको की रचना की ! इनमे कीर्तनग्घोषा सबसे प्रसिद्ध ग्रन्थ है ! वे खुद नाटक लिखते थे और उसका अभिनय करते थे ! इस प्रकार श्रीमंत शंकरदेव ने नाटको के अभिनय तथा नृत्य-संगीत के द्वारा वैष्णव धर्म का व्यापक प्रचार किया ! असम के सभी जातियो के लोग उनके शिष्य बन गए ! सन 1568 ई. 120 वर्षो की आयु मे उनका देहाँत हुआ !

श्रीमंत शंकरदेव एक महान धार्मिक नेता थे ! उन्होने असम के लोगो मे धार्मिक जागरण पैदा की ! असम वासी आज भी उनके महान योगदानो के लिए उन्हे आदर से पूजते है !
अंतिम शब्द :- श्रीमंत शंकरदेव जी का यह लेख एक किताब द्वारा लि गई है !

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